सनातन धर्म शास्त्र कहता है,स्त्रियो की कोई जाती नही होती
कन्या पिता से जुड़ी होती है पर कन्यादान के बाद उसका अस्तित्व उससे जुड़ जाता है जिसको दान किया गया हो इसलिए नये परिवार का सरनेम/गोत्र मिलता है🤗
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कानून स्त्रियो के सरनेम को अधिकार से जोड़ता है👍
पर यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑन्टैरियो के मेलैने मैकइकेरॉन का तर्क है कि...महिलाये सरनेम बदलती है क्यो की पति के प्रति वफादारी जाहिर कर सके।
खैर कुछ स्वतंत्र विचार की लड़किया नाम नही लिखती है ।

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